Little Known Facts About Subconscious Mind Power.






सुमति की तो उस साड़ी को देख कर आँखें चमक उठी. बचपन से ही माँ की इस साड़ी के लिए उसके मन में ख़ास लगाव था. जब भी माँ ये साड़ी पहनती, वो अपनी माँ के आसपास ही उनके पल्लू से खेलते रहती थी. उस साड़ी का फैब्रिक रेशमी और सॉफ्ट था. वो उसके स्पर्श को कभी भूली नहीं थी. उसके मन में वही पुरानी प्यारी यादें फिर से आ रही रही थी. वो हमेशा सपने देखा करती थी कि काश वो कभी ये साड़ी पहन सके.

‘An infinite impetus behind this curiosity was the kind of parental affirmation that it been given.’

सुमति का गुस्सा तो बढ़ता ही जा रहा था. उसके हाथ काँप रहे थे जब वो अपने स्तनों को अपनी साड़ी से छुपाने की कोशिश कर रही थी. आज से पहले उसके लिए ये परिस्थिति कभी आई नहीं थी. पर एक अनजान आदमी की अनुपस्थिति में शायद वो थोड़ी डरी हुई थी. “क्या हुआ, सुमति? ये मैं हूँ. चैतन्य! मुझसे क्या शर्माना. अब तो एक महिना भी नहीं बचा है जब हम दोनों के बीच की सारी दीवारे ढह जाएँगी.

धीरे-धीरे दिल की यह कैफ़ियत भी बदल गयी और बीवी की तरफ से उदासीनता दिखायी देने लगी। घर में कपड़े नहीं है लेकिन मुझसे इतना न होता कि पूछ लूं। सच यह है कि मुझे अब उसकी खातिरदारी करते हुए एक डर-सा मालूम होता था कि कहीं उसकीं खामोशी की दीवार टूट न जाय और उसके मन के भाव जबान पर न आ जायं। यहां तक कि मैंने गिरस्ती की जरुरतों की तरफ से भी आंखे बंद कर लीं। अब मेरा दिल और जान और रुपया-पैसा सब फूलमती के लिए था। मैं खुद कभी सुनार की दुकान पर न गया था लेकिन आजकल कोई मुझे रात गए एक मशहूर सुनार के मकान पर बैठा हुआ देख सकता था। बजाज की दुकान में भी मुझे रुचि हो गयी।

The Subconscious mind is like a big filing cupboard that merchants all pleasant and uncomfortable ordeals, routines, visual visuals, information from your earlier lives, by delivery to childhood and present adult daily life. The Subconscious mind is not really right away available by your Mindful (aim) mind.

Quit the meditation. Attempt once more! Everybody thinks--and that is all right! There are lots of suggestions and tips for handling your hectic mind throughout a meditation that do not call for you to halt for your working day. Choose A further reply!

“ओहो, मेरे पेरेंट्स, पत्नी और बेटी घर से बाहर गए हुए थे आज. तो मैंने सोचा की थोडा एडवेंचर हो जाए. इसलिए मैं घर से ही साड़ी पहनकर निकल आई. सोची इस तरह यहाँ आकर तुरंत तेरी मदद कर सकूंगी. जितने जल्दी हो सके कार भगाते हुए लायी हूँ.

"Generating the routine Subconscious Mind Power of optimistic wondering will hold the mind, physique, and spirit pleased, healthy, and inspired to achieve any purpose you want to reach. Constructive considered could be the engine that assists you retain going."..." extra A Nameless

सुमति को ज़रा भी अंदाजा नहीं था कि कोई उसके कमरे में यूँ चल कर आ सकता है जब वो तैयार हो रही हो. आखिर तमीज़ भी कोई चीज़ होती है. उसने तो अपने ब्लाउज को भी अपनी साड़ी के आँचल से अब तक ढंका नहीं था. वो तो अब तक अपनी कमर के निचे प्लेट ही बना रही थी. उसने झट से अपनी साड़ी को दोनों हाथों से पकड़ा और तुरंत उससे अपने सीने को छुपाने लगी. ठीक वैसे ही जैसे कोई भी औरत करेगी यदि कोई अनजान आदमी उसके कमरे में घुसा चला आये.

Innovative insights. Any individual carrying out Innovative operate has seasoned the power of these wonderful mind layers. Unlike performing something fundamental and mundane like arithmetic (aware-thought), obtaining fully immersed or "in the zone" if you are drawing/ portray/ creating/ notion making/ building/ and so forth demands the mindful "Moi" mind to take a backseat, making it possible for the super-creative deep mind to surface area.

आखिर इस शांतिपूर्ण नीति को सफल बनाने न होते देख मैंने एक नयी युक्ति सोची। एक रोज मैं अपने साथ अपने शैतान बुलडाग टामी को भी लेता गया। जब शाम हो गयी और वह मेरे धैर्य का नाश करने वाली फूलों से आंचल भरकर अपने घर की ओर चली तो मैंने अपने बुलडाग को धीरे से इशारा कर दिया। बुलडाग उसकी तरफ़ बाज की तरफ झपटा, फूलमती ने एक चीख मारी, दो-चार कदम दौड़ी और जमीन पर गिर पड़ी। अब मैं छड़ी हिलाता, बुलडाग की here तरफ गुस्से-भरी click here आंखों से देखता और हांय-हांय चिल्लाता हुआ दौड़ा और उसे जोर से दो-तीन डंडे लगाये। फिर मैंने बिखरे हुए फूलों को समेटा, सहमी हुई औरत का हाथ पकड़कर बिठा दिया और बहुत लज्जित और दुखी भाव से बोला—यह कितना बड़ा बदमाश है, अब इसे अपने साथ कभी नहीं लाऊंगा। तुम्हें इसने काट तो नहीं लिया?

एक रोज शाम के वक्त रोज की तरह मैं आनंदवाटिका में सैर कर रहा था और फूलमती सोहलों सिंगार किए, मेरी सुनहरी-रुपहली भेंटो से लदी हुई, एक रेशमी साड़ी पहने बाग की क्यारियों में फूल तोड़ रही थी, बल्कि यों कहो कि अपनी चुटकिंयो मे मेरे दिल को मसल रही थी। उसकी छोटी-छोटी आंखे उस वक्त नशे के हुस्न में फैल गयी ,थीं और उनमें शोखी और मुस्कराहट की झलक नज़र आती थी।

यदि आपको कहानी पसंद आई हो, तो अपनी रेटिंग देना न भूले!

"My system matched with among the main points, Assume positively and practically nothing will occur damaging with your mind." MP Meldana Powsid

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *